मर कर भी अमर एक शक्स
एक गाँव ऐसा जिसकी मिट्टी में कुराबनी की खुशबू, जिसकी हवा में आज़ादी की महक.... जी हाँ!..बात हो रही है, शहीद भगत सिंह के गाँव खटकर कलां की.
इस गाँव को आज के समय मे लोग शहीद - ए - आज़म भगत सिंह के नाम से जानते है। गाँव में पर्वेश करते ही बहुत ही खूबसूरत बैठने के लिए एक जगह गाँव के लोगो द्वारा बनाई गई है। जहाँ पर लोग जा के बैठते भी है।
गाँव के लोग बताते हैं के भगत सिंह के माता पिता इस गाँव मे रहते थे हालांकि भगत सिंह यहा पर इतना नही रहे। लेकिन कभी कभी वो जरूर यहाँ आते थे।
उनके घर में पर्वेश करते ही ऐसा महसूस होता है कि मानो आज भी वहा कोई रहता हो क्योंकि गाँव की पंचायत ने उस घर को बड़े ही अच्छे तरीके से रखा है।
घर के अंदर जाने का मुख्य द्वार
उस घर मे हर एक चीज़ को बहुत संभाल के रखा गया है। जैसे कि उनका पलंग, उनकी टेबल कुरसी, उनकी अलमारी, आदि बहुत सी छोटी छोटी चीज़ें भी जो उनके बहुत करीब थी। उनके रसोई घर में भी समान बहुत अच्छे से रखा हुआ है। उनके द्वारा वृतो मे लिए जाने वाले बर्तन आज भी वहा पे रखे हैं। जैसे कि चांदी के गिल्लास, थाली, कटोरी, चम्मच, आदि।
हर एक चीज़ को इतने खूबसूरत और अच्छे ढंग से रखा गया हैं कि कोई सोच भी नहीं सकता के उस घर मे कोई नहीं रहता।
उनके रसोई घर का दृष्
इसके इलावा गाँव की दीवारों पे बनी हुई उनकी तस्वीरें इस बात को साबित करती हैं कि लोगों को आज भी उनसे कितना प्यार हैं।
दीवारों पे उनके जनम से लेकर शहीद होने तक की पूरी सूचना लिखी हुई थी ता जो, जो लोग बाहर से घूमने आते हैं, उनको कोई परेशानी ना हो।
दीवार उपर बनी उनकी तस्वीर
इसके अलावा गाँव की सरहद पर एक संग्रहालय भी बनाया गया है, जो के उन शहीदों को समरपं हैं जो देश की खातिर अपनी जिंदगी कुर्बान कर गए।
संग्रहालय के कुछ दृष्........
ये सब कुछ साबित करता हैं कि भले ही वो अब इस दुनिया में नही हैं पर वो लोगो के दिलों में आज भी जिंदा हैं और हमेशा रहेगा।
भगत सिंह की याद में बनाई गयी उनकी मूरत












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